40 दिन बाद डीएनए से पहचानी शावक की मां; पहचान जरूरी थी, ऐसा नहीं होता तो जंगल में शावक की जान काे खतरा था https://ift.tt/2MqK8W7 - Sarkari NEWS

Breaking

This is one of the best website to get news related to new rules and regulations setup by the government or any new scheme introduced by the government. This website will provide the news on various governmental topics so as to make sure that the words and deeds of government reaches its people. And the people must've aware of what the government is planning, what all actions are being taken. All these things will be covered in this website.

Wednesday, June 3, 2020

40 दिन बाद डीएनए से पहचानी शावक की मां; पहचान जरूरी थी, ऐसा नहीं होता तो जंगल में शावक की जान काे खतरा था https://ift.tt/2MqK8W7

महाराष्ट्र में चंद्रपुर के जंगल में मां से बिछड़े बाघ के शावक की डीएनए जांच कर 40 दिन बाद उसे मां से मिलाने की तैयारी कर ली गई है। यह शावक जंगल से भटकते हुए चंद्रपुर के दाबगांव में आ पहुंचा था। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह देश का पहला मामला है, जब किसी बाघ के शावक की मां की पहचान के लिए अपशिष्ट का परीक्षण किया गया है, क्योंकि इस इलाके में दो मादा बाघिन घूम रही हैं।

ट्रीटमेंट सेंटर में शावक को कोरोना से बचाने के लिए क्वारेंटाइन किया गया था

मां से बिछड़े चार महीने के शावक को वन विभाग ने 24 अप्रैल को चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर भेजा था। कोरोना के मद्देनजर सावधानी बरती गई और उसे 14 दिन क्वारैंटाइन किया गया। लक्षण सामने न आने पर उसकी मां की तलाश शुरू हुई।

दरअसल, इलाके में दो मादा बाघिन अपने बच्चों के साथ रह रही हैं। वन विभाग को डर था कि यदि गलत बाघिन के पास शावक गया तो उसे वह स्वीकार नहीं करेगी। तब दोनों बाघिन के मल के नमूने जांच के लिए हैदराबाद के सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी भेजा गया था।

शावक को उसकी वास्तविक मां के पास छोड़ना जरूरी थाः प्रधान वनसंरक्षक

मंगलवार को वहां से रिपोर्ट आ गई और पता चला कि टी-2 बाघिन ही उस शावक की मां है। महाराष्ट्र के प्रधान वनसंरक्षक नितिन काकोड़कर ने बताया कि शावक को उसकी वास्तविक मां के पास छोड़ना जरूरी था। यदि ऐसा नहीं करते तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।

दाबगांव इलाके में दो बाघिन हैं और दोनों के तीन-तीन शावक हैं। ऐसे में वन विभाग ने उन्हें टी-1 और टी-2 नाम दिए थे। अब रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है कि टी-2 बाघिन उस शावक की मां है। ट्रांजिट सेंटर से यह बाघिन महज 7-8 किमी के क्षेत्र में भ्रमण कर रही है।

अब नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथरिटी की गाइडलाइंस के तहत शावक को मां के पास छोड़ा जाएगा। क्या बाघिन शावक को पहचान लेगी? इस पर वन्यप्राणी विशेषज्ञ मारुति चितमपल्ली ने बताया कि शावकों को दिन के उजाले में देखने में दिक्कत होती है। बाघिन उन्हें गुफा में छोड़कर शिकार करने जाती है।

इस दौरान कई शावक बाहर निकलकर भटक जाते हैं। हालांकि, बाघिन गंध के आधार पर शावक को पहचान लेती है। इस वजह से घबराने की जरूरत नहीं है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
ट्रीटमेंट सेंटर में रखा गया शावक।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3gSIU3G

No comments:

Post a Comment