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Monday, July 6, 2020

बोले- 'यह मेरी खुशनसीबी, लोगों को बचाने के लिए साल में 24 बार प्लाज्मा डोनेट करूंगा' https://ift.tt/3iEDdHo

कोरोना के उबरने के बाद योगेश धाकड़ संक्रमित मरीजों के लिए अब तक तीन बार प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। योगेश को अप्रैल में कोरोना का संक्रमण हुआ और 20 दिन तक दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रहे। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वह पिछले 45 दिन में तीन बार प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। उनका कहना है, जब तक शरीर है तब तक हर 15 दिन में प्लाज्मा डोनेट करता रहूंगा।

दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट में बतौर नर्सिंग ऑफिसर काम करने वाले योगेश ने दैनिक भास्कर से अब तक की पूरी कहानी बताई। उन्हीं के शब्दों में जानिए उनकी कहानी...

"मैं मध्य प्रदेश के ग्वालियर से हूं और दिल्ली में एक दोस्त के साथ रहता हूं। अप्रैल में मेरी ड्यूटी कोविड सेक्शन में लगाई गई थी। यहीं से संक्रमण हुआ और 18 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मैं एसिम्प्टोमैटिक था, लिहाजा कोविड-19 के लक्षण नहीं दिख रहे थे। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 20 दिन तक दिल्ली के सफरदरजंग हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रहा।

एसिम्प्टोमैटिक होने के कारण चीजें सामान्य थीं। मेरे पास काफी समय था इसलिए मैं वहीं योग और वर्कआउट करता था। इलाज के बाद रिपोर्ट्स निगेटिव आईं और संक्रमण खत्म हुआ। मैंने वापस ड्यूटी जॉइन कर ली। मैं अक्सर रक्तदान करता रहता हूं, इसलिए कई जगह मेरा मोबाइल नम्बर रजिस्टर्ड है। एक दिन मेरे पास प्लाज्मा डोनेट करने के लिए कॉल आया। मैं डोनेशन के लिए पहुंचा, पूरी साफ-सफाई और सावधानी के बीच प्लाज्मा डोनेट किया।

मैक्स हॉस्पिटल के दो मरीजों को मेरा प्लाज्मा चढ़ाया गया। दोनों की उम्र करीब 50 साल थी। उनमें से एक ने मेरे घर के पते पर मिठाई का डिब्बा भेजा। दूसरी बार, जब ग्वालियर लौटा तो एक परिचित ने मुझसे मरीज के लिए प्लाज्मा डोनेट करने को कहा। तीसरी बार रोहिणी-दिल्ली के जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल से आएमएल हॉस्पिटल में कॉल आया, उन्हें किसी मरीज के लिए प्लाज्मा की जरूरत थी, तीसरी बार तब डोनेट किया।"

आइसोलेशन के दौरान योगेश ने योग और वर्कआउट करना जारी रखा।

ब्लड और प्लाज्मा बैंक में बरती जा रही सावधानी के बीच मुझे बिल्कुल भी संक्रमण का खतरा नहीं महसूस हुआ। मुझे खुशी हुई कि मैं जिस संक्रमण से गुजरा उससे जूझ रहे मरीजों की मदद कर पा रहा है। इस समय एक-दूसरे की मदद करना बेहद जरूरी है। एक साल में 24 बार प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं, इसलिए मैं हर 15 दिन में ऐसा करूंगा, ताकि किसी दूसरे मरीज को महामारी के संकट से उबार सकूं। जब तक शरीर स्वस्थ है, मैं प्लाज्मा डोनेट करतारहूंगा।

मैं खुशनसीब हूं कि मुझे मौका मिला कि महामारी से जूझ रहे मरीजों की मदद कर सकूं। कोरोना से उबरने के बाद कुछ लोग प्लाज्मा डोनेट करने में झिझकते हैं। बिल्कुल भी डरने की जरूरत है नहीं है क्योंकि आपका प्लाज्मा तभी लिया जाएगा जब रिपोर्ट निगेटिव आएगी और इस दौरान सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है। इसे डोनेट करना बिल्कुल सेफ है। डोनेशन के बाद मुझे किसी तरह की कोई कमजोरी महसूस नहीं हुई। मैं काफी खुश था।

योगेश 15 बार से अधिक रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है, कोरोना से उबर चुके हैं तो प्लाज्मा डोनेट करें।

3 पॉइंट : क्या है प्लाज्मा डोनेशन और कौन कर सकता है

  • आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ तरुन भटनागर के मुताबिक, प्लाज्मा खून का एक हिस्सा होता है। इसे डोनेट करने से कोई कमजोरी नहीं आती है। यह बिल्कुल ब्लड डोनेशन जैसा है।
  • 18 से 60 साल के ऐसे लोग जो कोरोना से उबर चुके हैं। रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। 14 दिन तक कोविड-19 के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं, वो डोनेट कर सकता है।
  • जिनका वजन 50 किलो से कम है वे प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते। गर्भधारण कर चुकी महिलाएं, कैंसर, गुर्दे, डायबिटीज,हृदय रोग फेफड़े और लिवर रोग से पीड़ित लोग प्लाज्मा दान नहीं कर सकते।

कोरोना मरीजों में कैसे काम करती है प्लाज्मा थैरेपी
ऐसे मरीज जो हाल ही में बीमारी से उबरे हैं उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो ताउम्र रहते हैं और इस वायरस से लड़ने में समर्थ हैं। ये एंटीबॉडीज ब्लड प्लाज्मा में मौजूद रहते हैं। इनके ब्लड से प्लाज्मा लेकर संक्रमित मरीजों में चढ़ाया जाता है। इसे प्लाज्मा थैरेपी कहते हैं। ऐसा होने के बाद संक्रमित मरीज का शरीर तबतब तक रोगों से लड़ने की क्षमता यानी एंटीबॉडी बढ़ाता है जब तक उसका शरीर खुद ये तैयार करने के लायक न बन जाए।



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Delhi Coronavirus/Plasma Therapy Latest News Updates; Yogesh Dhakad Donor Story


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