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Friday, September 18, 2020

78% पैरेंट्स नहीं भेजना चाहते बच्चों को अभी स्कूल, नौकरीपेशा पैरेंट्स ज्यादा चिंतित; 67% बच्चों को नहीं पसंद आई ऑनलाइन पढ़ाई https://ift.tt/3ceSLyN

महीनों से बंद पड़े स्कूलों को खोलने के संकेत सरकार पहले ही दे चुकी है। आगामी 21 सितंबर से कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के स्कूल दोबारा खुलने वाले हैं। हालांकि, इसके लिए सरकार ने पहले पैरेंट्स से अनुमति मांगी है, यानी अगर माता-पिता नहीं चाहते तो बच्चा स्कूल नहीं जाएगा।

स्कूल वापसी की तैयारियां चाहे जो भी हों, सवाल यह उठता है कि क्या वाकई माता-पिता मानसिक रूप से अपने बच्चे को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं? ऑनलाइन शिक्षा कंपनी एसपी रोबोटिक्स वर्क्स की स्टडी में मिले आंकड़ों के अनुसार, करीब 78% पैरेंट्स महामारी खत्म होने तक अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर स्कूल नहीं भेजना चाहते।

भले ही बच्चे को क्लास दोबारा पढ़नी पड़े
स्टडी में शामिल पैरेंट्स स्थिति सामान्य होने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। भले ही इसके लिए बच्चे का साल छूट जाए या बच्चे को क्लास दोबारा ही क्यों न पढ़नी पड़े। स्टडी के मुताबिक, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद में रहने वाले माता-पिता अपने बच्चों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं।

जबकि, बड़े शहरों की तुलना में चेन्नई और कोलकाता में मामला अलग है। यहां पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ रिस्क उठाने के लिए तैयार हैं। ऐसा नहीं है कि बच्चों के साथ जोखिम नहीं उठाने वाले पैरेंट्स और बच्चे ऑनलाइन एजुकेशन के समर्थक हैं। 64% पैरेंट्स का मानना है कि ऑनलाइन पढ़ाई से ज्यादा बेहतर क्लासरूम है। इतना ही नहीं 67% बच्चे भी ऑनलाइन स्कूल एजुकेशन को सही नहीं मानते हैं।

भोपाल की रहने वाली प्रीति दुबे कहती हैं, "ऑनलाइन क्लासेस से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं, क्योंकि क्लास के मुकाबले बच्चे ऑनलाइन लर्निंग में पूरी तरह फोकस नहीं कर पाते।" हालांकि, वे माहौल सामान्य होने तक ऑनलाइन क्लासेस का ही समर्थन करती हैं।

माता-पिता के पेशे का पड़ता है प्रभाव
स्टडी के अनुसार, पैरेंट्स का प्रोफेशन उनकी प्रतिक्रिया में बड़ी भूमिका निभाता है। आंकड़े बताते हैं कि वेतनभोगी माता-पिता अपने बच्चों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। ऐसे केवल 17% पैरेंट्स ही अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। जबकि 30% सेल्फ एम्पलॉयड और 56% फ्रीलांस करने वाले पैरेंट्स स्कूल खुलने के तुरंत बाद अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं।

स्कूल से दूर रहकर मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं बच्चे
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चे काफी समय से अपने स्कूल रुटीन और साथियों से दूर हैं। यह दूरी उन्हें मानसिक तौर पर भी परेशान कर रही है। अहमदाबाद में साइकैट्रिस्ट और काउंसलर डॉ. ध्रुव ठक्कर के मुताबिक, बच्चे अपने साथियों के साथ मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं और यही चीज उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है।

ऐसे में स्कूल का खुलना बच्चों के मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा पैरेंट्स को भी बच्चों की पढ़ाई की चिंता कम होगी और वे दूसरे कामों में ध्यान लगा पाएंगे।

बच्चों की स्कूल वापसी पर पैरेंट्स क्या करें...?

  • सफाई का वादा: अब जब छात्र स्कूल का रुख करने वाले हैं तो माता-पिता को यह पक्का कर लेना चाहिए कि क्या बच्चा सावधानियों को लेकर चिंतित है या नहीं। महामारी के दौरान घर में याद रखी जा रही सभी सफाई और दूरी की आदतों को दोहराने का वादा लें।
  • बार-बार याद न दिलाएं: अगर आप बच्चों को बार-बार कोई चीज कहेंगे तो हो सकता है वे परेशान हो जाएं। बच्चे भी महामारी का बराबरी से सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी अपनी सुरक्षा की जानकारी है। बच्चों से सवाल करें कि वे स्कूल में क्या करेंगे। इससे उन्हें अपनी तरह से बात समझाने का मौका मिलेगा।
  • स्कूल रुटीन फिर दोहराएं: ऑनलाइन क्लासेज के दौरान बच्चों ने जो सबसे ज्यादा मिस किया है, वह है स्कूल का रुटीन। माता-पिता फिर से बच्चों की स्कूल की तैयारियों को पुराने तरीके से दोहराएं। इससे बच्चों को नयापन मिलेगा और वे स्कूल के लिए उत्साहित रहेंगे।
  • जानकारी साझा करें: समय-समय पर बच्चों से जानकारियां साझा करते रहें। कई बार बच्चे बाहर से गलत जानकारियां लेकर आते हैं और उन्हें फॉलो भी करने लगते हैं। बच्चों से खुलकर बातचीत करें, ताकि आपको उनके मन की बात पता लगे और सही जानकारी उन्हें मिल सके।
  • सेफ्टी किट: महामारी में स्कूल बैग भी बदला हुआ नजर आएगा। कॉपी-किताबों, लंच बॉक्स के अलावा बैग में एक्स्ट्रा मास्क, सैनिटाइजर शामिल करें। बच्चों के साथ एक गर्म पानी की बोतल जरूर रखें। घर से पानी ले जाने के कारण उन्हें स्कूल में किसी सतह को बार-बार नहीं छूना पड़ेगा।
  • उम्मीदों का भार न डालें: महामारी ने बच्चों के जीवन को भी खासा प्रभावित किया है। महीनों से अपने दोस्तों और क्लास रूम की गतिविधियों से दूर बच्चे धीरे-धीरे ही अपनी पुरानी लय में लौट सकेंगे। ऐसे में माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वे उनपर पढ़ाई का ज्यादा दबाव न बनाएं। बच्चों के साथ पैरेंट्स सपोर्टिव रहें।
  • प्रोत्साहन करें: एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादातर बच्चों को स्कूल लौटने की खुशी है। पैरेंट्स और टीचर्स को यह ध्यान रखना होगा कि उनकी यह खुशी बनी रही। उनपर चीजों को पुराने तरीकों से समझाने की कोशिश न करें। हो सकता है महीनों से ऑनलाइन क्लासेज कर रहा बच्चा तुरंत किसी बात को न समझ पाए। ऐसे में बच्चा मायूस न हो, इस बात का ख्याल रखना होगा।


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78% of parents do not want to send children to school yet; 67% of children did not like studying online


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