जो कहते थे- मैं देश नहीं बिकने दूंगा, उनकी ही सरकार में सबसे ज्यादा कंपनियों की हिस्सेदारी बिकी; जानें क्या कहते हैं आंकड़े? https://ift.tt/3ggjldd - Sarkari NEWS

Breaking

This is one of the best website to get news related to new rules and regulations setup by the government or any new scheme introduced by the government. This website will provide the news on various governmental topics so as to make sure that the words and deeds of government reaches its people. And the people must've aware of what the government is planning, what all actions are being taken. All these things will be covered in this website.

Saturday, December 5, 2020

जो कहते थे- मैं देश नहीं बिकने दूंगा, उनकी ही सरकार में सबसे ज्यादा कंपनियों की हिस्सेदारी बिकी; जानें क्या कहते हैं आंकड़े? https://ift.tt/3ggjldd

आज से ठीक 6 साल, 9 महीने और 10 दिन पीछे चलते हैं। उस दिन तारीख थी 20 फरवरी 2014। नरेंद्र मोदी उस समय प्रधानमंत्री नहीं थे। सिर्फ प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। गुजरात के अहमदाबाद में उनकी रैली थी। यहां उन्होंने एक कविता पढ़ी- ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं बिकने दूंगा।’ ये कविता बहुत लंबी है, जिसे लिखा है प्रसून जोशी ने। इस कविता को मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कई बार दोहरा चुके हैं।

अब लौटते हैं मुद्दे पर। आज उन्हीं नरेंद्र मोदी की सरकार है और उन्हीं की सरकार में सबसे ज्यादा सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेची गई। मोदी सरकार अब देश की दूसरी सबसे बड़ी फ्यूल रिटेलर कंपनी भारत पेट्रोलियम (BPCL) में 53.3% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। इसके जरिए सरकार को 40 हजार करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है।

मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी या शेयर बेचकर जितनी रकम जुटाई गई है, उतनी रकम 23 सालों में भी नहीं जुटी। इस पूरी प्रक्रिया को कहते हैं डिसइन्वेस्टमेंट या विनिवेश।

क्या होता है डिसइन्वेस्टमेंट?

इन्वेस्टमेंट या निवेश क्या होता है, जब किसी कंपनी या संस्था में पैसा लगाया जाता है। इसका उल्टा होता है डिस-इन्वेस्टमेंट या विनिवेश, यानी किसी कंपनी या संस्था से अपना पैसा निकालना। जब सरकार किसी सरकारी कंपनी से अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर उससे रकम जुटाती है, तो इस प्रक्रिया को कहते हैं डिस-इन्वेस्टमेंट।

अक्सर विनिवेश और निजीकरण को एक ही मान लिया जाता है। लेकिन दोनों में काफी अंतर होता है। निजीकरण में सरकार अपनी 51% से ज्यादा की हिस्सेदारी किसी निजी कंपनी को बेच देती है, जबकि विनिवेश में सिर्फ कुछ हिस्सा ही बेचा जाता है। विनिवेश की प्रक्रिया में सरकार का कंपनी पर मालिकाना हक बना रहता है। लेकिन निजीकरण में सरकार का कोई मालिकाना हक नहीं रह जाता।

हालांकि, कई बार विनिवेश का फायदा भी होता है। कई सरकारी कंपनियां ऐसी होती हैं, जिन पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी कोई मुनाफा नहीं होता। इस वजह से सरकार ऐसी कंपनियों से अपनी हिस्सेदारी या शेयर बेच देती है। ताकि सरकार का पैसा न लगे। सरकार का पैसा यानी हमारा और आपका पैसा।

सरकार को विनिवेश की जरूरत क्यों पड़ती है?

होता ये है कि सरकार देश चलाती है और देश चलाने की लिए जरूरत होती है पैसों की। ये पैसा सरकार टैक्स के जरिए वसूलती है, लेकिन इतनी रकम से डेवलपमेंट वर्क नहीं हो पाता। इसके लिए सरकार पैसा जुटाने के लिए सरकारी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचती और रकम जुटाती है। इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब किसी घर में खर्च चलाना मुश्किल होता है, तो लोग घर का सामान बेचते हैं। ऐसा ही सरकार भी करती है।

BPCL की हिस्सेदारी क्यों बेच रही है सरकार?

अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार BPCL की हिस्सेदारी क्यों बेच रही है। दरअसल, 2020-21 के लिए सरकार ने विनिवेश के जरिए 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का टारगेट रखा था। लेकिन कोरोना की वजह से अभी तक सरकार सिर्फ 6,311 करोड़ रुपए ही जुटा सकी है। BPCL के जरिए सरकार को 40 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा पिछले 4 साल से BPCL का प्रॉफिट कम होता ही जा रहा था। 2018-19 में कंपनी को 7,132 करोड़ रुपए का फायदा हुआ था, जो 2019-20 में घटकर 2,683 करोड़ रुपए हो गया।

मोदी सरकार में अब तक कितनी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक चुकी है? और सरकार ने इससे कितना कमाया?

मई 2014 में केंद्र में पहली बार मोदी सरकार आई। तब से लेकर अब तक मोदी सरकार में 121 कंपनियों की हिस्सेदारी बिक चुकी है। इससे सरकार ने 3.36 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कमाई की है। ये आंकड़ा किसी सरकार में विनिवेश के जरिए जुटाई गई रकम का सबसे ज्यादा हिस्सा है।

1991 में जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब सरकार ने सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाने के लिए डिस-इन्वेस्टमेंट करने का फैसला लिया था। उसके बाद से अब तक के करीब 30 सालों में सरकार डिसइन्वेस्टमेंट के जरिए 4.89 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा जुटा चुकी है। सबसे ज्यादा रकम मोदी सरकार में ही जुटाई गई है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Narendra Modi Vs Congress Govt PSU Disinvestment: BPCL Privatization Latest News, Everything Know In Smiple Words


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2VECEmW

No comments:

Post a Comment